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महाराष्ट्र में सरकार गठन पर सस्पेंस गहराया, सोनिया-पवार की मुलाकात के बाद और उलझा सत्ता का पेच

Nov, 20 2019

19 November 2019 

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सरकार गठन पर सस्पेंस और गहरा हो गया है। सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार की मुलाकात के बाद पेच खुलने के बजाय और उलझ गया। शिवसेना के साथ-साथ कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं की निगाह भी सोनिया गांधी और शरद पवार की बहुप्रतीक्षित बैठक पर लगी थी। मगर जब सोनिया से मुलाकात के बाद शरद पवार पत्रकारों से रूबरू हुए तो साफ कहा कि पवार ने यह कहते हुए शिवसेना की धड़कनें और बढ़ा दी हैं कि सोनिया गांधी से तो सरकार के गठन को लेकर उनकी चर्चा ही नहीं हुई। महाराष्ट्र में नई सरकार की कमान थामने की उम्मीद लगा रही शिवसेना के लिए कांग्रेस और एनसीपी का यह रुख झटके से कम नहीं माना जा रहा। राकांपा प्रमुख ने कहा कि सरकार गठन की बात है तो भाजपा-शिवसेना से पूछिए क्योंकि वे साथ मिलकर चुनाव लड़े थे। शिवसेना की विचारधारा को लेकर सोनिया गांधी की आपत्ति सरकार बनाने में आड़े आने के सवाल को भी पवार ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब कांग्रेस अध्यक्ष से सरकार गठन पर बात ही नहीं हुई तो यह सवाल कहां। पवार के रुख का समर्थन करते कांग्रेस का यह सपाट बयान जाहिर कर रहा है कि महाराष्ट्र में सत्ता की चाबी शिवसेना को सौंपने की दिशा में अभी कई पेच खुलने बाकी हैं।  

महाराष्ट्र में मचे राजनीतिक घमासान के बीच शिवसेना बीजेपी पर लगातार निशाने साध रही है. आज शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में बीजेपी नेताओं पर हमला बोला है. शिवसेना ने बीजेपी नेताओं से पूछा है कि हमें एनडीए से निकालने वाले तुम कौन हो? दिल्ली के बीजेपी नेताओं ने किस आधार पर और किसकी अनुमति से यह घोषणा की? दिल्ली के मोदी मंत्रिमंडल में से प्रह्लाद जोशी ने यह घोषणा की है कि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस से शिवसेना के संबंध जुड़ने के कारण उन्हें ‘एनडीए’ से बाहर निकाल दिया गया है और उनके सांसदों को संसद में विरोधी पक्ष में बैठाया गया है.’’ शिवसेना को बाहर निकालने का निर्णय किस बैठक में और किस आधार पर लिया गया?’’

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