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गुजरात की राजनैतिक नसबंदी, हम एक ( राज्य) हमारे दो ( राजनैतिक दल).

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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने 'जन विकल्प' के साथ अपना गठजोड़ सार्वजनिक कर दिया है. दुनिया को पता चल गया की गंगाधर ही शक्तिमान है. यानी जन विकल्प की संकल्पना के पीछे शंकर सिंह वाघेला ही थे. लेकिन गुजरात का इतिहास देखें तो इस नए दल की राह आसान नहीं है. यह नया दल किसी एक निश्चित दल का आंकड़ा बिगाड़ेगा या फिर अपना वजूद बनाने के लिए भारी मशक्कत करता दिखाई देंगा. कम-से-कम गुजरात का इतिहास तो यही कह रहा है.
गुजरात की अलग राज्य के रुप मे स्थापना हुई तब से लेकर अब तक. यानी पिछले 57 सालों में गुजरात मे कई दल बने और खत्म हुए. बीजेपी और कांग्रेस को छोड़ अन्य कोई भी दल गुजरात में राजनीति नहीं कर पाया. इंदु चाचा की जनता परिषद से लेकर 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में केशुभाई पटेल तक कई दिग्गज नेताओ ने नए दल बनाए, चुनाव भी लड़े. लेकिन प्रमुख पार्टी बनकर कोई भी नहीं उभर पाया. पिछले 50 सालों में जनता परिषद, नूतन गुजरात जनता परिषद, कीमलोप, राष्ट्रीय जनता पार्टी, जनता दल - गुजरात, राष्ट्रीय कांग्रेस, लोक स्वराज्य मंच, सुराज्य परिषद, युवा विकास पार्टी समेत एक दर्जन से ज्यादा दल …