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आज जब टीपू सुल्तान की जन्म जयंती उत्सव मनाने को लेकर विवाद हो रहा है. ऐसे में यह फोटो बड़ी प्रासंगिक है. 27 अप्रेल 2011 को मैं रिपोर्टिंग के लिए कर्नाटक से आंध्र प्रदेश की ओर जा रहा था, तब मुझे टीपू सुल्तान के जन्म स्थल को देखने का मौका मिला. कर्नाटक से आंध्र की और बढते समय हाई-वे के करीब देवनहल्ली नामक जगह आती है. कहा जाता है कि 1751 AD में टीपू सुल्तान का जन्म इसी जगह हुआ था.

मैं यहां शाम 4 बजे के करीब पहुंचा. मुझे लगता था कि यहां भारी भीड़ होगी - काफी पर्यटक होंगे. लेकिन इन तमाम बातो से विपरीत इस जगह के आस पास कोई नहीं था. इस जगह से सटकर लोगो के घर बन चुके है. प्रशासन ने टीपू के जन्म स्थल पर एक चौतरा बनाया है.जगह बड़ी शांत है, कोई शोर नहीं. 
मैसूर के शेर का जन्मस्थान देखकर बहुत अच्छा लगा.
#Tipu Sultan #Mysore #Devanahalli #Mayur Parikh











Digital Governanace - Article by Shailesh Gandhi, Former Central Information Commissioner

Prime Minister Narendra Modi has announced his commitment for a Digital India, and demonstrated it by visiting Silicon Valley. I hope this happens soon, but there is smaller step which he can take within two years if he wishes.
All the government work is done on paper files. When a citizen goes to any office for some work, he is often told that the relevant file is unavailable. If he pays a bribe it becomes available. It is common knowledge that depending on the amount of the bribe in many offices a record in the file can be altered, replaced or lost. A significant percentage of corruption and inefficiency is a consequence of this method of keeping paper files. Many government offices create records which they cannot access after a few months! Most have computers which are usually used as electric typewriters. There is a fairly simple solution available. If all the work was done on computers and each day the default mode was that it would be displayed on the website, there could be a…

शिवसेना की जीत के शिल्पकार ओवैसी बंधु.

बांद्रा पूर्व के उपचुनाव मे निर्णायक भूमिका रही ओवैसे बंधुओ की.
·लगातार हिन्दू विरोधी बयानों के चलते हिन्दू समुदाय एकजुट होकर शिवसेना को वोट दिया. ·मुस्लिम मतो का बंटवारा हुआ. ·मुस्लीम पोकेट्स में पिछले चुनाव के मुकाबले कम मतदान हुआ. ·बीजेपी के मतदाताओ ने भी शिवसेना को वोट दिया. ·शिवसेना अपने मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने में कामयाब रही.

नारायण राणे मुंबई की बांद्रा पूर्व सीट पर 20 हजार मतों से हारे है और एमआयएम के 11000 मत नारायण राणे के खाते में जोड़ दिए जाए तबभी नारायण राणे का आंकड़ा विजयी आंकडे ( 51000 ) को पार नहीं कर रहा. एसे में यह हार किसकी यह सबसे बडा सवाल है. आखीर नारायण राणे पूरजोर ताकत लगाने पर भी क्यों नहीं जीत पाए.
मीडिया इस हार को नारायण राणे की हार बता रहा है. टी.वी. मीडिया में नारायण राणे चुनाव हारे यह सुर्खियां देखने मिल रही है. क्योंकि नारायण राणे यह कॉग्रेस में एक बड़ा नाम है. वास्तव में यह हार नारायण राणे से अधिक कॉग्रेस की हार है. इस सीट पर चुनाव प्रचार के लिए कॉग्रेस के तमाम स्थानीय नेताओं के अलावा एनसीपी नेता शरद पवार ने भी राणे के लिये प्रचार किया था. कॉग्रे…