Wednesday, November 12, 2014

बीजेपी के समर्थन से एनसीपी को क्या लाभ मिलेगा.

सरकार बनाने मे अहम भूमिका रही एनसीपी की. लेकिन पावर पोलिटीक्स मे माहिर पवार को यह कदम उठाने से क्या लाभ हुआ. आने वाले समय मे कौन से कौन से मुद्दो पर बीजेपी को एनसीपी के बारेमे नर्म रुख अख्त्यार करना पडेगा यह देखना दिलचस्प होगा. 

राजनिती मे कई कदम बेहद शातीर तरीके से लिए जाते है. महाराष्ट्र मे बीजेपी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने सहकार मंत्री चंद्रकांत पाटील के साथ मिलकर एक एसा ही फैसला लिया. तारीख थी ६ नवंबर, देर शाम मंत्रालय मे हुई बैठक मे महाराष्ट्र की 302 बाझार समिती यानी एपीएमसी मे से 100 एपीएमसी कमिटीओ को एक्सटेन्शन देने से मना कर दिया गया. यह वो एपीएमसी है जिनकी मियाद ५ साल की होती है और सरकार यदि चाहे तो उसे एक्सटेन्शन दे सकता है. अक्तूबर मे पुरे होने वाले इन तमाम एपीएमसी कमिटीओ को सरकार चाहे तो फिर एक बार काम करने की इजाजत दे सकती है. लेकिन यह नहीं हुआ. अब यहां चुनाव होने की लंभावना है. इतना ही नहीं इन एपीएमसी मे एडमिनीस्ट्रेटरो को नियुक्त कर दिया जा सकता है. जिन एपीएमसीओ को एक्सटेंशन नहीं दिया उनमे वाशी एपीएमसी मार्केट भी शामिल है जोकि राज्य की सबसे ज्यादा टर्नओवर करने वाली एपीएमसी भी है. इसके अलावा पूणे, अमरावती, दादरा नगर हवेली की एपीएमसी भी शामिल है. कहने की जरुरत नहीं कि इन एपीएमसीओ मे एनसीपी और कोंग्रेस का दबदबा है. खासतौर पर एनसीपी. सबको पता  है कि एनसीपी की राजनिती की रीढ की हड्डी है सहकार क्षेत्र की इकाईयां. यहीं उनके कार्यकर्ता और नेता काम करते है यहीं से लोगो को संपर्क मे आते है और यहीं से उनकी गांव की राजनिती शुरु होती है. सरकार के इस एक फैसले से सहकार क्षेत्र मे हडकंप मच गया. क्या यहीं से बीजेपी की राजनिती शुरु हुई.  

अब इन एपीएमसी मे ६ महिनो के बाद चुनाव होंगे. इन चुनावो मे सरकार की भूमिका अहम होगी. एनसीपी यदि सरकार से दो दो हाथ कर ले तो उसे महंगा पड सकता है. वहीं सींचाई घोटाले की फाईले सरकार के पास मौजु है. एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओ के नाम इन फाईलो मे नामजत है. सरकार चाहे तो इनपर इन्कवाईरी शुरु कर सकती है जिसका नतीजा एनसीपी के लिए भयानक हो सकता है. इसके अलावा एनसीपी के नेताओ के खिलाफ बीजेपी के नेता किरीट सोमैया ने कोर्ट मे कई केस कर रखे है. आय से अधिक संपत्ती से लेकर सरकारी काम मे कोताही के आरोप है. इन तमाम केसीस की कमान बीजेपी के याचीका कर्ताओ के पास है. एसेमे एनसीपी ने जो रुख हाउस मे लिया है वह रुख आने वाले दिनो मे उन्हे क्या क्या लाभ पहुंचाता है वह देखना दिलचस्प होगा. क्या यहीं तमाम मामले पवार साहब की पावर डील है. सवाल का जवाब आनेवाले दिनो मे मिलेगा.





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