अमरीका भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए लेगा इन्फार्मेशन टैकनोलोजी का सहारा


हाल ही मे अमरीका के चीफ इन्फार्मेशन ऑफीसर विवेक कुंदरा मुंबई आए थे. पत्रकारो से औपचारिक बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह अमरीका में भी सरकारी प्रोजेक्ट्स फेल हो रहे हैं. जिसके चलते सरकार को अरबो डॉलर का घाटा हो रहा है. इस पूरे मामले पर जवाबदेही किसी की नहीं होती और अंत में उसी काम के लिए कुछ साल बाद फिर एक बार टैंडर निकलता है जो कि फिर करोड़ो डॉलर का भ्रष्टाचार साबित होता है. सरकार इस बात से परेशान हो चुकी है. लिहाजा अब एक ऐसा डैशबोर्ड बनाया जाएगा जिसके तहत पूरे देश में सरकार द्वारा दिए जा रहे ठेको की सारी जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी. मसलन यह ठेका किसने दिया है, कितने डॉलर में, उसे कब पूरा होना था और फिलहाल उस काम की क्या स्थिति है.
यह एक क्रांतिकारी विचार है. इस तरह के कदम से भ्रष्टाचारिओं की नकेल कसी जा सकती है. क्योंकि जब आप डैशबोर्ड पर पाएंगे की आपके घर की नजदीकी सड़क बनाने का ठेका साल 2002 में दिया गया था. लेकिन सड़क कभी बनी ही नहीं और पैसे दिए जा चुके है तो आप शिकायत के माध्यम से भ्रष्टाचारिओं को सबक सिखा सकते है. भारत देश में यह जानकारी पाने के लिए आपको माहिती अधिकार अधिनियम का सहारा लेना पडता है.
इस डैश बोर्ड के बन जाने से पूरे विश्व के सामने सारी जानकारी उपलब्ध होगी. लिहाजा आम आदमी से लेकर ठेका न पाने वाली कंपनी तक सभी ठेके पर पैनी नजर गड़ाए रहेंगे और जरा सा भी भ्रष्टाचार होने की सूरत में कानूनी कार्यवाही सुलभ होगी.
भारत में भी ऐसा होना चाहिए....

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विवेक कुंद्रा जैसे विचार रखने वाले और उसे जमीनी स्तर पर उतारने वाले लोग इस भारत देश में हर गांवों में दो चार की संख्या में हैं ,लेकिन इन विचारों को अमली जामा पहनाने के लिए इस देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का बेहद इमानदार और जनहितैसी होना बहुत जरूरी है | लेकिन इस देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद पर बैठा व्यक्ति को पारदर्शिता और भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में कोई लगाव ही नहीं है ,इसका सबूत है इनकी नाक के निचे हजारों कड़ोर का कोमनवेल्थ गेम के प्रोजेक्ट में हुआ भ्रष्टाचार ...?

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